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INDIA

रज़ा

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  तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो तेरी हर रज़ा में भी मेरी मजा हो  तुझसे अलग जी न चलता जहां का  हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो।। तुझसे है सूरज ये चांदनी तुझसे तुझसे जहां है ये रागिनी तुझसे तुझसे महकती फिज़ा इस जहां की सारे जहां की तुम्ही एक वजह हो हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो  तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो।। मेरे मौला मैं तो हूं आशिक तेरा ही गले से लगा ले या दूरी बना ले  मैं होके फ़ना हो जाऊं जहां की रहम के बिना तेरे जीना कज़ा हो हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो।।                        🎉DC✨️✨️✨️                                    🍓🍍🍍👍👍

छत्तीसगढ़ के पर्यटन केंद्रों की राष्ट्रीय पहचान कैसे बने? ,chhattisgarh ka paryatan sthal

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मध्य भारत में स्थित प्राकृतिक सौंदर्य से सुसज्जित  छत्तीसगढ़  प्रांत अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक एवं आर्थिक वैभव से समृद्ध राष्ट्र में अलग पहचान रखती है। पंडित सुंदरलाल शर्मा के शब्दों में "जो भूभाग उत्तर में  विध्यांचल   व नर्मदा से दक्षिण की ओर इंद्रावती व ब्रह्माणी तक है। जिसके पश्चिम में वेन गंगा बहती है ,और जहां पर गढ़ नामाबाची ग्राम संज्ञा है जहां पर सिंगबाजा का प्रचार है,जहां स्त्रियों का पहनावा प्रायः एक वस्त्र है तथा जहां धान की खेती होती है, वही भूमि छत्तीसगढ़ है।" छत्तीसगढ़ के संदर्भ में शब्दों का यह मणिकांचन प्रयोग इस धरा के सौंदर्य बोध का परिचायक है। छत्तीसगढ़ में पर्यटन की विविध संभावनाएं है ,यहां ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का भरमार है। इस भूमि पर राम, गांधी और बुद्ध के पदचिह्न हैं इस पूण्य भूमि की सुंदरता देखते ही बनती है। chhattisgarh ka paryatan sthal   रायगढ़ में बोतल्दा, सिंहनपुर की गुफा पाषाण कालीन स्थल हैं। यहां अनेक शैल चित्र बिखरे हुए हैं। इसके अतिरिक्त  रामायण, महाभारत ,जैन-बौद्ध, मौर्य एव...

गधे को गंगा जल

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गधे को गंगाजल वर्षों मालिक को सेवा देने के बाद आखिर मेरा भी सेवानिवृत्ति का समय आ गया,पिछले कुछ दिनों से शारीरिक क्षमता क्षिर्ण हुई है हालात की गंभीरता को समझते हुए मालिक ने सेवा मुक्ति का आदेश जारी कर दिया है।अब तो पैर भी नही चलते हैं बची जिंदगी बैठे ही गुजारनी है सो घर के बाहर पीपल के ओट में बेर के छांव तले मेरे अंतिम आवास हेतु भूमि आबंटित हुआ है,शायद ये वहीं पांच गज जमीन है जिसका सबको इंतजार होता है।वृद्ध हो चला हूँ,चमड़ी कोमल हो गयी है आसानी से बेर के कांटे चुभ जाते हैं,तन में लहू बचा नही सो रिसता नही ,हाँ थोड़ा तकलीफ जरूर होता है पर अपने मालिक के लिए क्या इतना सह नही सकता! आखिर बिना काम लिए दो वक्त का आधा पेट सही खाना तो दे ही देता है,नक्कारा खच्चर इससे बेहतर और क्या उम्मीद पाले वैसे भी हम तो गुलाम हैं।जब लोकतंत्र में लोग भूखे सोते हैं उससे तो बेहतर हैं।जब घनघोर कंटीली छाया में करवट बदलता हूँ तो जरूर बदन पर कांटे चुभते हैं पर वो खुरों पर कील ठोकने से बेहतर है।अब तो बस चंद वक्त ही रह गये हैं न जाने कब बुलावा आ जाये मगर जो वक्त है वो तमाम उम्र की हिसाब करने बैठ गयी है और मे...

सड़कों पर बेमौत मरती गायें समाधान क्या?

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गौ ,गंगा, गायत्री ,गीता, सभी पूज्य हैं परम पुनीता। भारतवर्ष में गाय न केवल पशु है अपितु यह हमारी समृद्धि एवं समन्वित संस्कृति का अद्वितीय धरोहर है भारत में गाय को गौ माता का दर्जा प्राप्त है, साथ ही गौ सेवा, गौ पूजन एवं गौ आराधना से संबंधित अनेक तीज-त्यौहार भारतीय जनमानस एवं लोक व्यवहार में व्याप्त है। 20 वीं पशु जनगणना के आधार पर भारत में पशुधन की संख्या 300 मिलियन से भी  अधिक है जो विश्व में सर्वाधिक है साथ ही भारत दुग्ध उत्पादन में भी प्रथम स्थान पर है इस प्रकार भारत में गाय एवं गोवंश का महत्वपूर्ण आर्थिक स्थान भी है।  भारत में गोधन कृषि, परिवहन, दुग्ध  एवं मांस उत्पादन में उपयोगी रहा है गाय एक ऐसा पशु है जिसकी गोबर, मूत्र ,चर्म, अस्थि, मांस सभी उपयोगी है गाय की यह बहुआयामी उपयोगिता प्राचीन काल से चली आ रही है। ॠगवैदिक काल में गायों की महत्ता चरम पर थी तब गायों के लिए युद्ध हुआ करता था जिसे गावेष्टी कहा जाता  था गायों को मुद्रा की तरह उपयोग किया जाता था गोवंश के इस विपुल उपयोगिता के कारण ही इन्हें पशुधन  या गोधन कहा जाता है परंतु आज के औद्योगिक समा...

'नव भारत'की संकल्पना चुनौतियां और संभावनाएं

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'नव भारत' गांधी,सुभाष,सरदार पटेल,अंबेडकर,नेहरू जैसे महान् लोगों के सपनों का भारत है। निकट भविष्य में गरीबी, भ्रष्टाचार, अपराध, आतंकवाद, नक्सलवाद इत्यादि व्याधियों से मुक्त और एकता, अखंडता, सहिष्णुता ,समानता ,बंधुत्व, वैज्ञानिकता, सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक क्षमताओं से युक्त सशक्त राष्ट्र को 'नव भारत' की संज्ञा दी गई है। दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित एवं उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति के रूप में पहचान बनाने वाली भारत अब नव सृजन के राह पर निकल पड़ा है।सन् 2014 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही नवीन भारत की नींव रखी गई जिसका मूल उद्देश्य भारत का समावेशी विकास है,इस हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय एवं लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं।यथा गांधी जी के 150वीं जयंती पर 'स्वच्छ भारत की संकल्पना', भारत छोड़ो आन्दोलन के 75वीं वर्षगांठ पर गरीबी,गंदगी और आतंक भारत भारत छोड़ो का नारा दिया गया, सबके लिए आवास,पेयजल,हर घर को बिजली,स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता इत्यादि सामाजिक सुविधाओं को सुनिश्चित किया गया है इसके साथ ही अधोसंरचनात्मक परिवर्तन जैसे डिजिटल इंडिया, वित्तीय समावेशन, आयुष्मान भारत निर्मा...

अनुराग

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प्रेम,प्यार,अनुराग न जाने और क्या क्या कहते हैं लोग इसे।भारतीय समाज में प्रेम का महत्व उतना ही प्राचीन है जितनी सभ्यता क्योंकि हमारे यहाँ सम्पूर्ण चर-अचर से संबंध का आधार या मूल तत्व प्रेम को माना गया है।आज के परिवेश में प्रेम को एक विकृति के रूप में प्रस्तुत करने का दुस्साहस किया जा रहा है आज युवा धड़ल्ले से संबंध बना रहे हैं जिसे बढ़ते अपराध का कारण भी माना जा रहा है आज का यह लेख इसी भ्रांति को दूर कर प्रेम के सकारात्मक पहलू को प्रस्तुत करने का प्रयास मात्र है। हमारे भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में प्रेम के महत्व को रेखांकित किया गया है।महाप्रभु वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग एवं सूफ़ीवाद का प्रमुख विषय ही प्रेम है इस प्रकार प्रेम ईश्वर से मिलने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।मीरा को साक्षात कृष्ण के दर्शन अपने निष्काम प्रेम के बल पर ही प्राप्त हुआ था।वाल्मीकि हो या कालिदास स्त्री के प्रेम ने ही उन्हें इतिहास में अमर कर दिया।फिर तो हमारे यहाँ प्रेम करने वालों की फहरिश्त बड़ी लम्बी है हीर-रांझा हो या लैला-मजनूँ आज भी युवाओं की पहली पसंद है। भारतीय धर्म शास्त्र में भी पुरुषार्थ के चार प्र...

अरे! यार!

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ये कहानी है तीन दोस्तों की जिनकी दोस्ती का परवान जितनी तेजी से चढ़ा था उससे भी तेज गति से उतरने का सिलसिला रहा ऐसा क्यों हुआ आइये जानते हैं। बात कालेज के दिनों की है।इंजीनियरिंग करने के लिए मैं रायपुर आ गया था एक प्रतिष्ठित कालेज में एडमिशन भी मिल गया।वैसे यहाँ दोस्त तो बहुत बने मगर जैसे होता है न कुछ विशेष लोगों से विशेष अपनापन ये लेख उन्ही खास दोस्तों के लिए है।वैसे तो आदेश,जागृत,राधेश्याम और तरूण मेरे सबसे करीब रहे मगर आज हम बात करेंगे सिर्फ आदेश और जागृत की। मेरे क्लास का पहला दिन था,मैं तकरीबन एक माह बाद क्लास ज्वाइन किया था।पहले ही रो में आदेश और जागृत बैठे थे वे तब तक पक्के दोस्त बन चुके थे मैं उनसे अनजान था और मुझे एक माह का सिलेबस भी कम्पलीट करना था सो मेरा ध्यान पढ़ाई में लग गया पंद्रह दिन बाद क्लास टेस्ट था मैं उसमें अव्वल आ गया इस पर हमारे फिजिक्स के टिचर ने उत्साह बढाया और उसके बाद आदेश से बातचीत प्रारंभ हुआ हम दोस्त बन गए लेकिन जागृत अभी भी अलग-अलग था खैर कुछ दिनों बाद ही हम तीनों बेस्टफ्रेंड्स हो गये आदेश रोज टिफ़िन लाता था तो साथ में खाते थे कभी कैंटिन तो कभी मेस ...

घोटुलः-बहुद्देशीय आदिम व्यवस्था

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भारत विश्व के प्राचीन सभ्यताओं वाला देश है, इन्ही सभ्यताओं में से एक हमारे आदिवासी समाज है।हाल ही में हुए शोध में दक्षिण भारत से कुछ ऐसे मानवीय अवशेष प्राप्त हुए हैं जिनकी पहचान द्रविड़ प्रजाति के रूप में किया गया है तथा इसकी आयु चालिस हजार वर्ष आंका गया है साथ ही सिन्धु  सभ्यता से भी निकट संबंध पाया गया।वैसे भारत में 'आदिवासी 'के स्थान पर 'वनवासी 'शब्द को तरजीह दी गई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में भारत के कुल 705जातियों को अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है,जिसमें से 42जनजातियों का निवास स्थल छत्तीसगढ़ में है।'मुरिया' इन्ही में से एक है जिसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जनजाति माना जाता है।इनके खान-पान,आवास-निवास , भाषा,विवाह,व्यवसाय,मनोरंजन आदि में व्यापक विविधता है। 'घोटुल' मुरिया जनजातियों में समाजीकरण का एक महत्वपूर्ण अभिकरण है।यह एक बहुआयामी व्यवस्था है।इसका मुख्य उद्देश्य जनजातीय संस्कृति से युवाओं को परिचय कराना तथा मानसिक विकास सुनिश्चित करना है। मानवशास्त्री शरतचंद्र      के अनुुुसार घोटुल वह व्यवस्था है जहां आदिवासी यु...