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INDIA

रज़ा

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  तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो तेरी हर रज़ा में भी मेरी मजा हो  तुझसे अलग जी न चलता जहां का  हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो।। तुझसे है सूरज ये चांदनी तुझसे तुझसे जहां है ये रागिनी तुझसे तुझसे महकती फिज़ा इस जहां की सारे जहां की तुम्ही एक वजह हो हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो  तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो।। मेरे मौला मैं तो हूं आशिक तेरा ही गले से लगा ले या दूरी बना ले  मैं होके फ़ना हो जाऊं जहां की रहम के बिना तेरे जीना कज़ा हो हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो।।                        🎉DC✨️✨️✨️                                    🍓🍍🍍👍👍

रज़ा

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  तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो तेरी हर रज़ा में भी मेरी मजा हो  तुझसे अलग जी न चलता जहां का  हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो।। तुझसे है सूरज ये चांदनी तुझसे तुझसे जहां है ये रागिनी तुझसे तुझसे महकती फिज़ा इस जहां की सारे जहां की तुम्ही एक वजह हो हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो  तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो।। मेरे मौला मैं तो हूं आशिक तेरा ही गले से लगा ले या दूरी बना ले  मैं होके फ़ना हो जाऊं जहां की रहम के बिना तेरे जीना कज़ा हो हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो।।                        🎉DC✨️✨️✨️                                    🍓🍍🍍👍👍

किसी का जाना

किसी का जाना उसी का जाना नही होता, एक मांग का सिंदूर चला जाता है, खेती का मजदूर चला जाता है। बेटी का गांव चला जाता है, बेटे का छांव चला जाता है। एक घर की कमाई चली जाती है, माँ की दवाई चली जाती है। एक पिता का सहारा चला जाता है, एक भाई का किनारा चला जाता है। परिवार की हिम्मत चली जाती है, औलाद की किस्मत चली जाती है। दिवाली स्याह और होली बेरंग हो जाती है, एक घर बिखर जाता है, मकाँ सूनी हो जाती है। फिर जो भी मिले वो पाना पाना नही होता, किसी का जाना उसी का जाना नही होता।।                              ✍ धीवेंन्द्र 'तरूण'

प्रकृति

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nature झूमती हुई तितलियाँ, गाते हुए भौंरे और पत्ते डाल-डाल है ये प्रकृति का काया कल्प, कल्पना विशाल है, झील, झरना,सागर बहती , पर्वत घाटी भूगोल की, रात-दिन और चांद-सितारा यह खेल है खगोल की, शांतक्लांत सुंदर वरण,पक्षियों की बोल है,  आदि अंत जीव की , प्रकृति की मोल है ,  यहां जीव-जीव जुड़ रहे ,जीवन की जाल है,  यह प्रकृति का कायाकल्प कल्पना विशाल है। nature सोना ,चांदी ,हीरे ,मोती गर्भ में खदान है , मिल गई अनमोल ये इंसान को वरदान है, रंग-रूप , रोग , दुःख का प्रकृति निदान है, परिपूर्ण है प्रकृति यह विधि का विधान है , कलकल बहती जल, यह प्रकृति की ताल है, यह प्रकृति का कायाकल्प कल्पना विशाल है। आसमान में पंछियाँ,जंगल में जीव विहार है, फूलों की हर कलियों में ,आई नित बहार है , आसमान को पर्वत छूती,खुशियों का त्यौहार है, जीवन के हर रंग-रूप में , प्रकृति ही सार है , नित्य-निरंतर चंचलता,यह प्रकृति की हाल है, यह प्रकृति का कायाकल्प कल्पना विशाल है। Add caption नित्य दोहन कर रहा, इंसान का एक वर्ग है, घट रही उपस्थिति, यह प्रकृ...