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रज़ा

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  तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो तेरी हर रज़ा में भी मेरी मजा हो  तुझसे अलग जी न चलता जहां का  हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो।। तुझसे है सूरज ये चांदनी तुझसे तुझसे जहां है ये रागिनी तुझसे तुझसे महकती फिज़ा इस जहां की सारे जहां की तुम्ही एक वजह हो हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो  तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो।। मेरे मौला मैं तो हूं आशिक तेरा ही गले से लगा ले या दूरी बना ले  मैं होके फ़ना हो जाऊं जहां की रहम के बिना तेरे जीना कज़ा हो हँस के भी सह लेंगे कोई सजा हो तू रख ले मुझे जैसे तेरी रज़ा हो।।                        🎉DC✨️✨️✨️                                    🍓🍍🍍👍👍

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA)

9 दिसंबर 2019, लोकसभा में भारत सरकार के गृहमंत्री द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक सदन में रखा गया जो 11दिसंबर को राज्यसभा से भी पारित कर दिया गया,अंततः 12दिसंबर को महामहीम राष्ट्रपति द्वारा इस विधेयक को अनुमति प्रदान कर दी गई और विधेयक, अधिनियम में तब्दील हो गया इसके साथ ही देश में इसके पक्ष-विपक्ष में गहरा विचार-विमर्श के साथ वाद-विवाद पैदा हो गया।
संविधान  के प्रावधानों के साथ-साथ विभिन्न अधिनियमों में समय के साथ-साथ परिवर्तन होते रहे हैं।ऐसा नही है कि नागरिकता संशोधन विधेयक पहली बार लायी गयी हो इसके पूर्व भी 1976,1990,2003,2006 कई मौकों पर आवश्यकतानुसार तब्दीली की गई है।तब्दीली प्रक्रिया के लिहाज से यह संवैधानिक है तो फिर क्यों एक वर्ग विशेष द्वारा इसका पुरजोर विरोध किया जा रहा है विरोध के इन स्वरों में विधेयक के वो प्रावधान है जिसमें यह कहा गया है कि पाकिस्तान,अफगानिस्तान व बांग्लादेश के हिन्दू,सिक्ख,बौद्ध,जैन,ईसाई व पारसी शरणार्थियों को जो 31दिसंबर2014 के पूर्व भारत आये हैं नागरिकता प्रदान की जायेगी जबकि मुस्लिमों को इससे अलग रखा गया है उन्हें पूर्व के प्रावधानों के तहत प्रक्रिया का पालन करना होगा उसके बाद गृहमंत्रालय के इच्छा से ही उन्हें नागरिकता प्रदान की जायेगी जो प्रथम दृष्टया संविधान के अनुच्छेद 14 का उलंघ्घन नजर आता है।वास्तव में यह भी विरोध का असली कारण नही है।असली विरोध तो नागरिकता रजिस्टर (NRC)को लेकर है जिसके संदर्भ में गृहमंत्री द्वारा सदन में स्पष्ट स्वीकारोक्ति मौजूद है।वे NRCलाने वाले हैं इससे एक भय व भ्रम का माहौल पैदा हुआ है जैसे- यदि NRC में किसी हिन्दू का नाम न हो तो वह CAA के तहत देश का नागरिक मान लिया जायेगा परंतु उन्हीं परिस्थितियों में एक मुसलमान घुसपैठिया कहलायेगा जिसे सीधा अनुच्छेद14 के विरुद्ध माना जा रहा है।इस भय के कारण मुस्लिम समुदाय द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है।
CAA-2019
यदि इस अधिनियम के तकनीकी खामियों की बात की जाये तो वह यह कि सरकार की दावा खोखली नजर आती है,सरकार द्वारा लगातार कहा जा रहा है कि यह अधिनियम पड़ोस देश के धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए है जबकि इस पुरे कानून में कही भी 'धार्मिक प्रताड़ना' शब्द का उल्लेख ही नही किया गया है, साथ ही धार्मिक प्रताड़ना के संदर्भ में जांच की भी कोई व्यवस्था नही है ऐसे में यह कानून पड़ोस राज्यों के सभी अल्पसंख्यक चाहे वे धार्मिक रूप से प्रताड़ित हों या न हों भारतीय नागरिक हो जायेंगे साथ ही आतंकवादी भी हिन्दू भेस में घुसपैठ करने का प्रयास करेंगे।दुसरी बात यह की इसे संविधान के अनुच्छेद 14 के उलंघ्घन के तौर पर भी देखा जा रहा है जहां इस कानून द्वारा धर्म विशेष के प्रति भेदभाव की संभावना है तो वही मानवता के दलीलों पर भी खरा नही उतरता।सरकार यह कहती रही है कि वह मानवता के आधार पर इन्हें नागरिकता देना चाहती है परंतु मुस्लिम संप्रदाय में भी प्रताड़ित लोग जैसे बोहरा,अहमदिया के प्रति निष्ठुरता प्रकट करती है।
अब तो यह मुद्दा वर्ग विशेष का न होकर पुरे देश का हो गया है।जहां गांव-गांव व शहर-शहर विरोध के स्वर गूंज रहा है तो इसके समर्थन में भी लोग सड़कों पर उतर रहे हैंं जिससे संघर्ष की स्थिति भी बन रही है।इन सब विरोधी स्वरों में दिल्ली के शाहीन बाग का विरोध चर्चित है जहाँ पिछले दो महीने से माताएं अपने गोद में दूधमुहे बच्चों को लेकर रात-रात भर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं कई जगह हिंसा की स्थिति भी देखने को मिली है।जामिया,जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रबुद्ध शिक्षक एवं छात्रों ने भी इस कानून को विभाजनकारी माना है।केरल,पंजाब,पुद्दुचेरी व प०बंगाल जैसे राज्यों ने इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है।युवाओं में आक्रोश है कि सरकार वास्तविक मुद्दों से भटका रही है ताकि मंदी,बेरोजगारी,शिक्षा,स्वास्थ्य के बेहाली पर सवाल न किया जाये इसलिए युवाओं की बड़ी संख्या NRC के स्थान पर NRU- National Register For Unemployment की मांग कर रही है।हालांकि सरकार द्वारा NRCके मुद्दे पर कोई फैसला न होने की बात की गयी है परंतु इसके विचार को नकारा नहीं गया है ऐसे में NRC की संभावना तो बनी ही हुई है।इस प्रकार सरकार और जनता के बीच गतिरोध की स्थिति लगातार बढ़ती हुई दिखाई पड़ रही है किन्तु सरकार की ओर से अबतक कोई सकारात्मक रवैया देखने को नही मिला है।
गांधी जी कहते थे-"पड़ोस से आने वाले हर व्यक्ति के लिए हमारा दिल खुला होना चाहिए,उन्हें स्वीकारना चाहिए।"
इस बात से स्पष्ट है कि गांधी जी व्यक्ति मात्र के लिए चिंतित थे न की हिन्दू-मुस्लिम के लिए।साथ ही सरकार यदि चाहती तो थोड़ा और सावधानी बरत कर गतिरोध की स्थिति से निपटा जा सकता था जैसे 'धार्मिक अल्पसंख्यक' शब्द ही पर्याप्त होता अलग से धर्मों की उल्लेख की आवश्यकता न थी।सर्वदलीय मंथन , एवं जन समर्थन प्राप्त कर ऐसे गतिरोध के संभावनाओं को दूर किया जा सकता था।

Comments

  1. हमेशा की तरह अद्भुत,अद्वितीय 👏👏

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